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वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं? - भारत और समकालीन विश्व – I
वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं?
वाइमर गणराज्य के सामने मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित थीं:
वर्साय की अपमानजनक संधि: प्रथम विश्व युद्ध में हार के बाद वाइमर गणराज्य को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने पड़े, जिससे जर्मनी ने अपने कई महत्वपूर्ण क्षेत्र, खनिज भंडार और उपनिवेश खो दिए। जनता इस अपमान के लिए गणराज्य को ही दोषी मानती थी।
आर्थिक संकट: युद्ध के कर्ज और मुआवजे के बोझ के कारण जर्मनी की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई। 1923 में जर्मन मुद्रा 'मार्क' की कीमत इतनी गिर गई कि वहाँ 'अति-मुद्रास्फीति' (Hyperinflation) की स्थिति पैदा हो गई।
राजनीतिक अस्थिरता: वाइमर संविधान में 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' जैसी खामियाँ थीं, जिससे किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलता था और सरकारें बार-बार बदलती रहती थीं।
अनुच्छेद 48: इस प्रावधान ने राष्ट्रपति को आपातकाल लागू करने और नागरिक अधिकार रद्द करने की असीमित शक्तियाँ दे दीं, जिससे लोकतंत्र कमजोर हुआ।
1929 की महामंदी: वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण जर्मनी के उद्योग बंद हो गए, बेरोजगारी 60 लाख तक पहुँच गई और लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास उठने लगा।
विरोध: रूढ़िवादी और कट्टरपंथी समूह (जैसे नात्सी) लगातार गणराज्य का विरोध कर रहे थे और इसे 'नवंबर के अपराधी' कहकर पुकारते थे।