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नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ़ नफ़रत पैदा करने मे... - भारत और समकालीन विश्व – I
नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ़ नफ़रत पैदा करने में इतना असरदार कैसे रहा?
नात्सियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने में निम्नलिखित कारणों से असरदार रहा:
पुरानी धार्मिक शत्रुता का लाभ: ईसाइयों की यहूदियों के प्रति सदियों पुरानी धार्मिक नफरत (ईसा मसीह के हत्यारे के रूप में) का नात्सियों ने बखूबी फायदा उठाया।
मीडिया और फिल्मों का प्रयोग: 'द इटरनल ज्यू' (The Eternal Jew) जैसी प्रोपेगैंडा फिल्मों के जरिए यहूदियों की बेहद डरावनी और घिनौनी छवि पेश की गई। उन्हें 'चूहे', 'कीड़े' और 'मकड़ी' जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया गया।
भ्रामक शब्दावली: नात्सियों ने सामूहिक हत्याओं के लिए कभी 'हत्या' शब्द का प्रयोग नहीं किया। वे 'विशेष व्यवहार' (special treatment), 'अंतिम समाधान' (final solution) और 'चयन' जैसे शब्दों का उपयोग करते थे, ताकि दुनिया को उनकी क्रूरता का पता न चले।
स्कूली शिक्षा: बच्चों के दिमाग में बचपन से ही यहूदियों के प्रति नफरत भरी गई। स्कूलों में पढ़ाया गया कि यहूदी 'बुरे' होते हैं और जर्मन 'श्रेष्ठ'। यहाँ तक कि गणित के सवालों में भी यहूदी विरोधी उदाहरण दिए जाते थे।
आर्थिक संकट का जिम्मेदार ठहराना: हिटलर ने अपने भाषणों में यहूदियों को जर्मनी की आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी और प्रथम विश्व युद्ध में हार का मुख्य कारण बताकर जनता के गुस्से को उनकी ओर मोड़ दिया।
स्टीरियोटाइपिंग (छवि गढ़ना): पोस्टरों और विज्ञापनों में यहूदियों को लंबी नाक वाले, लालची और धूर्त सूदखोरों के रूप में दिखाया गया, जिससे आम जनता के मन में उनके प्रति घृणा बैठ गई।