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इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवा... - भारत और समकालीन विश्व – I
इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता क्यों मिलने लगी?
1930 तक जर्मनी में नात्सीवाद की लोकप्रियता बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
आर्थिक महामंदी: 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने जर्मनी को बुरी तरह प्रभावित किया। बैंक डूब गए, उद्योग बंद हो गए और बेरोजगारी 60 लाख तक पहुँच गई। जनता हताश थी और नात्सियों ने उन्हें बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया।
वाइमर गणराज्य की विफलता: लोकतांत्रिक वाइमर सरकार देश की समस्याओं (महंगाई, बेरोजगारी) को सुलझाने में नाकाम रही। इससे लोगों का लोकतंत्र से विश्वास उठ गया और वे एक सख्त शासन की ओर आकर्षित हुए।
वर्साय की संधि का अपमान: हिटलर ने वर्साय की संधि की नाइंसाफी को खत्म करने, खोए हुए इलाके वापस पाने और जर्मनी का खोया हुआ मान-सम्मान लौटाने का वादा किया।
हिटलर का प्रभावशाली व्यक्तित्व: हिटलर एक जबरदस्त वक्ता था। उसके जोशीले भाषण लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उसने खुद को एक 'मसीहा' के रूप में पेश किया जो जनता को आपदा से निकाल सकता था।
नात्सी दुष्प्रचार (Propaganda): नात्सी पार्टी ने बड़े पैमाने पर रैलियों, स्वास्तिक वाले झंडों और भव्य प्रदर्शनों के जरिए अपनी शक्ति दिखाई। उन्होंने यह संदेश दिया कि केवल हिटलर ही जर्मनी को फिर से शक्तिशाली बना सकता है।
साम्यवाद का डर: जर्मनी के मध्यम वर्ग और उद्योगपति साम्यवाद (Communism) के प्रसार से डरे हुए थे। नात्सियों ने खुद को साम्यवाद के कट्टर विरोधी के रूप में पेश किया, जिससे उन्हें संपन्न वर्ग का समर्थन मिला।