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आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों को किस... - क्षितिज भाग-1
आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिखिए।
आज की उपभोक्ता संस्कृति ने हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। अब त्योहार खुशियाँ बाँटने और सामाजिक मेल-जोल से अधिक अपनी आर्थिक संपन्नता का प्रदर्शन करने का माध्यम बन गए हैं। पहले त्योहारों में सादगी, पारंपरिक पकवान और प्रेम होता था, लेकिन अब हर त्योहार बाज़ारवाद की भेंट चढ़ गया है। विज्ञापनों के प्रभाव में आकर हम त्योहारों की मूल भावना को भूलकर महँगे उपहारों, ब्रांडेड कपड़ों और विलासिता की वस्तुओं को ही महत्त्व देने लगे हैं।
उदाहरण के लिए, दीपावली अब मिट्टी के दीयों और घर की मिठाइयों की जगह बिजली की लड़ियों और महँगे गिफ्ट पैक का त्योहार बन गई है। रक्षाबंधन जैसे रिश्तों के त्योहार को भी विज्ञापनों ने केवल महँगे उपहारों और चॉकलेट के लेन-देन तक सीमित कर दिया है। लोग अब परंपरा निभाने से ज़्यादा इस बात पर ध्यान देते हैं कि उनका 'स्टेटस' क्या है। इस दिखावे की संस्कृति के कारण त्योहारों की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता कम होती जा रही है और बाज़ार का लालच बढ़ता जा रहा है।