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Home» class 9»क्षितिज भाग-1» Chapter 3: उपभोक्तावाद की संस्कृति

लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कह... - क्षितिज भाग-1

Question

लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है?

उत्तर (Answer)

लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए निम्नलिखित कारणों से चुनौती कहा है:

  1. सांस्कृतिक पहचान का संकट: यह संस्कृति हमारी 'सांस्कृतिक अस्मिता' (पहचान) को धीरे-धीरे नष्ट कर रही है, जिससे हम अपनी मौलिकता खोते जा रहे हैं।

  2. अंधानुकरण: हम आधुनिक बनने की अंधी दौड़ में पश्चिमी संस्कृति का 'बौद्धिक दास' बनकर अंधानुकरण कर रहे हैं।

  3. सामाजिक असमानता: दिखावे की इस प्रवृत्ति के कारण अमीर और गरीब के बीच की दूरी बढ़ रही है, जिससे समाज में आक्रोश, ईर्ष्या और अशांति फैल रही है।

  4. संसाधनों की बर्बादी: विलासिता की वस्तुओं की चाह में हम अपने सीमित प्राकृतिक संसाधनों का भारी अपव्यय (नुकसान) कर रहे हैं।

  5. गांधीजी के आदर्शों के विपरीत: गांधीजी चाहते थे कि हम अपनी जड़ों पर टिके रहें और अपनी संस्कृति को बचाए रखें, लेकिन उपभोक्तावाद हमें समाज की नींव से भटका रहा है।

यही कारण है कि लेखक ने इसे भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती माना है।

Related Questions

धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है।
इस वाक्य में 'बदल रहा है' क्रिया है। यह क्रिया कैसे हो रही है—धीरे-धीरे। अतः यहाँ धीरे-धीरे क्रिया-विशेषण है। जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जहाँ वाक्य में हमें पता चलता है क्रिया कैसे, कब, कितनी और कहाँ हो रही है, वहाँ वह शब्द क्रिया-विशेषण कहलाता है।

(क) ऊपर दिए गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया-विशेषण से युक्त पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
(ख) धीरे-धीरे, ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम, ज़्यादा, यहाँ, उधर, बाहर—इन क्रिया-विशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
(ग) नीचे दिए गए वाक्यों में से क्रिया-विशेषण और विशेषण शब्द छाँटकर अलग लिखिए—

वाक्यक्रिया-विशेषणविशेषण
(1) कल रात से निरंतर बारिश हो रही है।  
(2) पेड़ पर लगे पके आम देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया।  
(3) रसोईघर से आती पुलाव की हल्की खुशबू से मुझे ज़ोरों की भूख लग आई।  
(4) उतना ही खाओ जितनी भूख है।  
(5) विलासिता की वस्तुओं से आजकल बाज़ार भरा पड़ा है।  

 

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  • 'दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का बच्चों पर बढ़ता प्रभाव' विषय पर अध्यापक और विद्यार्थी के बीच हुए वार्तालाप को संवाद शैली में लिखिए।

  • इस पाठ के माध्यम से आपने उपभोक्ता संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। अब आप अपने अध्यापक की सहायता से सामंती संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त करें और नीचे दिए गए विषय के पक्ष अथवा विपक्ष में कक्षा में अपने विचार व्यक्त करें।

    क्या उपभोक्ता संस्कृति सामंती संस्कृति का ही विकसित रूप है

  • आप प्रतिदिन टी.वी. पर ढेरों विज्ञापन देखते-सुनते हैं और इनमें से कुछ आपकी ज़बान पर चढ़ जाते हैं। आप अपनी पसंद की किन्हीं दो वस्तुओं पर विज्ञापन तैयार कीजिए।

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Chapter Info

Subject: क्षितिज भाग-1
Class: class 9
Chapter 3: उपभोक्तावाद की संस्कृति
Medium: Hindi Medium