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लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कह... - क्षितिज भाग-1
लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है?
लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए निम्नलिखित कारणों से चुनौती कहा है:
सांस्कृतिक पहचान का संकट: यह संस्कृति हमारी 'सांस्कृतिक अस्मिता' (पहचान) को धीरे-धीरे नष्ट कर रही है, जिससे हम अपनी मौलिकता खोते जा रहे हैं।
अंधानुकरण: हम आधुनिक बनने की अंधी दौड़ में पश्चिमी संस्कृति का 'बौद्धिक दास' बनकर अंधानुकरण कर रहे हैं।
सामाजिक असमानता: दिखावे की इस प्रवृत्ति के कारण अमीर और गरीब के बीच की दूरी बढ़ रही है, जिससे समाज में आक्रोश, ईर्ष्या और अशांति फैल रही है।
संसाधनों की बर्बादी: विलासिता की वस्तुओं की चाह में हम अपने सीमित प्राकृतिक संसाधनों का भारी अपव्यय (नुकसान) कर रहे हैं।
गांधीजी के आदर्शों के विपरीत: गांधीजी चाहते थे कि हम अपनी जड़ों पर टिके रहें और अपनी संस्कृति को बचाए रखें, लेकिन उपभोक्तावाद हमें समाज की नींव से भटका रहा है।
यही कारण है कि लेखक ने इसे भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती माना है।