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यह यात्रा राहुल जी ने 1930 में की थी। आज के समय यदि तिब्बत... - क्षितिज भाग-1
यह यात्रा राहुल जी ने 1930 में की थी। आज के समय यदि तिब्बत की यात्रा की जाए तो राहुल जी की यात्रा से कैसे भिन्न होगी?
क्या आपके किसी परिचित को घुमक्कड़ी/यायावरी का शौक है? उसके इस शौक का उसकी पढ़ाई/काम आदि पर क्या प्रभाव पड़ता होगा, लिखें।
अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
आम दिनों में समुद्र किनारे के इलाके बेहद खूबसूरत लगते हैं। समुद्र लाखों लोगों को भोजन देता है और लाखों उससे जुड़े दूसरे कारोबारों में लगे हैं। दिसंबर 2004 को सुनामी या समुद्री भूकंप से उठने वाली तूफानी लहरों के प्रकोप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कुदरत की यह देन सबसे बड़े विनाश का कारण भी बन सकती है।
प्रकृति कब अपने ही ताने-बाने को उलट कर रख देगी, कहना मुश्किल है। हम उसके बदलते मिज़ाज को उसका कोप कह लें या कुछ और, मगर यह अबूझ पहेली अक्सर हमारे विश्वास के चीथड़े कर देती है और हमें यह अहसास करा जाती है कि हम एक कदम आगे नहीं, चार कदम पीछे हैं। एशिया के एक बड़े हिस्से में आने वाले उस भूकंप ने कई द्वीपों को इधर-उधर खिसकाकर एशिया का नक्शा ही बदल डाला। प्रकृति ने पहले भी अपनी ही दी हुई कई अद्भुत चीजें इंसान से वापस ले ली हैं जिसकी कसक अभी तक है।
दुख जीवन को माँजता है, उसे आगे बढ़ने का हुनर सिखाता है। वह हमारे जीवन में ग्रहण लाता है, ताकि हम पूरे प्रकाश की अहमियत जान सकें और रोशनी को बचाए रखने के लिए जतन करें। इस जतन से सभ्यता और संस्कृति का निर्माण होता है। सुनामी के कारण दक्षिण भारत और विश्व के अन्य देशों में जो पीड़ा हम देख रहे हैं, उसे निराशा के चश्मे से न देखें। ऐसे समय में भी मेघना, अरुण और मैगी जैसे बच्चे हमारे जीवन में जोश, उत्साह और शक्ति भर देते हैं। 13 वर्षीय मेघना और अरुण दो दिन अकेले खारे समुद्र में तैरते हुए जीव-जंतुओं से मुकाबला करते हुए किनारे आ लगे। इंडोनेशिया की रिज़ा पड़ोसी के दो बच्चों को पीठ पर लादकर पानी के बीच तैर रही थी कि एक विशालकाय साँप ने उसे किनारे का रास्ता दिखाया। मछुआरे की बेटी मैगी ने रविवार को समुद्र का भयंकर शोर सुना, उसकी शरारत को समझा, तुरंत अपना बेड़ा उठाया और अपने परिजनों को उस पर बिठा उतर आई समुद्र में, 41 लोगों को लेकर। महज 18 साल की यह जलपरी चल पड़ी पगलाए सागर से दो-दो हाथ करने। दस मीटर से ज़्यादा ऊँची सुनामी लहरें जो कोई बाधा, रुकावट मानने को तैयार नहीं थीं, इस लड़की के बुलंद इरादों के सामने बौनी ही साबित हुईं।
जिस प्रकृति ने हमारे सामने भारी तबाही मचाई है, उसी ने हमें ऐसी ताकत और सूझ दे रखी है कि हम फिर से खड़े होते हैं और चुनौतियों से लड़ने का एक रास्ता ढूँढ़ निकालते हैं। इस त्रासदी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए जिस तरह पूरी दुनिया एकजुट हुई है, वह इस बात का सबूत है कि मानवता हार नहीं मानती।
(1) कौन-सी आपदा को सुनामी कहा जाता है?
(2) 'दुख जीवन को माँजता है, उसे आगे बढ़ने का हुनर सिखाता है'—आशय स्पष्ट कीजिए।
(3) मैगी, मेघना और अरुण ने सुनामी जैसी आपदा का सामना किस प्रकार किया?
(4) प्रस्तुत गद्यांश में 'दृढ़ निश्चय' और 'महत्व' के लिए किन शब्दों का प्रयोग हुआ है?
(5) इस गद्यांश के लिए एक शीर्षक 'नाराज़ समुद्र' हो सकता है। आप कोई अन्य शीर्षक दीजिए।
पाठेतर सक्रियता
प्रश्न 1: यह यात्रा राहुल जी ने 1930 में की थी। आज के समय यदि तिब्बत की यात्रा की जाए तो राहुल जी की यात्रा से कैसे भिन्न होगी?
उत्तर: आज की तिब्बत यात्रा राहुल जी की यात्रा से निम्नलिखित रूप में भिन्न होगी:
यातायात के साधन: राहुल जी के समय में घोड़े और खच्चर मुख्य साधन थे, जबकि आज वहाँ पक्की सड़कें, रेल सेवा (चीन-तिब्बत रेलवे) और हवाई मार्ग उपलब्ध हैं।
सुरक्षा: उस समय डाकुओं का बहुत डर था, लेकिन अब कानून-व्यवस्था बेहतर होने से यात्रा सुरक्षित हो गई है।
भेष: राहुल जी को भिखारी के भेष में यात्रा करनी पड़ी थी, लेकिन अब पर्यटक के रूप में सम्मानजनक तरीके से यात्रा की जा सकती है।
सुविधाएँ: अब रास्ते में रुकने के लिए अच्छे होटल और संचार (इंटरनेट/मोबाइल) की सुविधाएँ मौजूद हैं।
प्रश्न 2: क्या आपके किसी परिचित को घुमक्कड़ी/यायावरी का शौक है? उसके इस शौक का उसकी पढ़ाई/काम आदि पर क्या प्रभाव पड़ता होगा, लिखें।
उत्तर: हाँ, मेरे एक परिचित को घुमक्कड़ी का बहुत शौक है। उनके इस शौक का उनके काम और जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है:
व्यावहारिक ज्ञान: यात्राओं के कारण उनका व्यावहारिक ज्ञान किताबी ज्ञान से कहीं अधिक है।
मानसिक ताज़गी: घुमक्कड़ी से उन्हें मानसिक शांति मिलती है, जिससे वे अपने काम को और अधिक ऊर्जा और रचनात्मकता के साथ कर पाते हैं।
धैर्य और साहस: यात्रा की कठिनाइयों ने उन्हें जीवन की चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करना सिखाया है।
अपठित गद्यांश के उत्तर
(1) कौन-सी आपदा को सुनामी कहा जाता है?
उत्तर: समुद्री भूकंप के कारण समुद्र में उठने वाली अत्यधिक ऊँची और विनाशकारी तूफानी लहरों को 'सुनामी' कहा जाता है।
(2) 'दुख जीवन को माँजता है, उसे आगे बढ़ने का हुनर सिखाता है'—आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका आशय यह है कि दुःख मनुष्य को आंतरिक रूप से मज़बूत और परिपक्व बनाता है। यह हमें सुख की अहमियत समझाता है और कठिन परिस्थितियों से लड़कर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा और कौशल प्रदान करता है।
(3) मैगी, मेघना और अरुण ने सुनामी जैसी आपदा का सामना किस प्रकार किया?
उत्तर: मेघना और अरुण ने दो दिनों तक अकेले खारे समुद्र में तैरते हुए और समुद्री जीव-जंतुओं का मुकाबला करते हुए अपनी जान बचाई। वहीं मैगी ने समुद्र के खतरे को पहचान कर तुरंत बेड़ा उठाया और अपने परिवार सहित 41 लोगों की जान बचाकर अदम्य साहस का परिचय दिया।
(4) प्रस्तुत गद्यांश में 'दृढ़ निश्चय' और 'महत्व' के लिए किन शब्दों का प्रयोग हुआ है?
उत्तर:
'दृढ़ निश्चय' के लिए: बुलंद इरादे
'महत्व' के लिए: अहमियत
(5) इस गद्यांश के लिए एक शीर्षक 'नाराज़ समुद्र' हो सकता है। आप कोई अन्य शीर्षक दीजिए।
उत्तर:अजेय मानवता (या कुदरत का कोप और मानवीय साहस)