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थोङ्ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश म... - क्षितिज भाग-1
थोङ्ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्र वेश भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिला सका। क्यों?
इसका मुख्य कारण 'जान-पहचान' और 'समय' का अंतर था:
पहली यात्रा के समय: लेखक के साथ सुमति थे, जिनकी उस गाँव में अच्छी जान-पहचान थी। सुमति के बहुत से 'यजमान' वहाँ रहते थे, इसलिए भिखमंगे के वेश में होने के बावजूद उन्हें ठहरने की अच्छी जगह मिल गई।
दूसरी यात्रा के समय: लेखक अकेले थे और 'भद्र' (सभ्य) वेश में थे, फिर भी उन्हें रहने की अच्छी जगह नहीं मिली। इसका कारण यह था कि वे शाम के समय वहाँ पहुँचे थे और शाम के वक्त वहाँ के लोग 'छंग' (एक नशीला पदार्थ) पीकर अपने होश खो देते थे। साथ ही, उस समय उनकी जान-पहचान कराने वाला सुमति जैसा कोई व्यक्ति उनके साथ नहीं था।