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एक शिक्षिका छात्रों की संसद के आयोजन की तैयारी कर रही थी। ... - लोकतांत्रिक राजनीति
एक शिक्षिका छात्रों की संसद के आयोजन की तैयारी कर रही थी। उसने दो छात्रों से अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की भूमिका करने को कहा। उसने उन्हें विकल्प भी दिया। यदि वे चाहें तो राज्य सभा में बहुमत प्राप्त दल की नेता हो सकतीं थी और अगर चाहें तो लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल की। अगर आपको यह विकल्प दिया गया तो आप क्या चुनेंगे और क्यों?
मैं लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल का नेता बनना चुनूँगा।
इसका कारण निम्नलिखित है:
वास्तविक शक्ति: भारतीय संविधान के अनुसार, लोकसभा के पास राज्यसभा की तुलना में अधिक शक्तियाँ होती हैं।
सरकार का अस्तित्व: मंत्रिपरिषद (सरकार) केवल तभी तक पद पर बनी रह सकती है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त हो। राज्यसभा किसी सरकार को हटा नहीं सकती।
वित्तीय अधिकार: बजट और धन संबंधी कानूनों (Money Bills) के मामले में लोकसभा का निर्णय ही अंतिम होता है। राज्यसभा इसमें केवल 14 दिनों की देरी कर सकती है, उसे खारिज नहीं कर सकती।
संयुक्त बैठक: यदि किसी साधारण कानून पर दोनों सदनों में मतभेद हो, तो संयुक्त बैठक में लोकसभा की सदस्य संख्या अधिक होने के कारण अक्सर उसी की राय मानी जाती है।
अतः, देश के शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए लोकसभा का नेता होना अधिक प्रभावशाली है।