Logo

Get Updates

Subscribe to receive instant notifications for new study materials and important updates.

Home» class 9»लोकतांत्रिक राजनीति» Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज

तीन दोस्त एक ऐसी फिल्म देखने गए जिसमें हीरो एक दिन के लिए मुख्... - लोकतांत्रिक राजनीति

Question

तीन दोस्त एक ऐसी फिल्म देखने गए जिसमें हीरो एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनता है और राज्य में बहुत से बदलाव लाता है। इमरान ने कहा कि देश को इसी चीज़ की ज़रूरत है। रिज़वान ने कहा कि इस तरह का, बिना संस्थाओं वाला एक व्यक्ति का राज खतरनाक है। शंकर ने कहा कि यह तो एक कल्पना है। कोई भी मंत्री एक दिन में कुछ भी नहीं कर सकता। ऐसी फिल्मों के बारे में आपकी क्या राय है?

उत्तर (Answer)

ऐसी फिल्मों के बारे में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से मेरी राय निम्नलिखित है:

  1. संस्थाओं का महत्व (रिज़वान का तर्क): रिज़वान की बात सही है। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति की 'वीरता' से नहीं, बल्कि संस्थाओं (संविधान, कानून, और प्रक्रियाओं) से चलता है। बिना संस्थाओं और नियमों के एक व्यक्ति का शासन तानाशाही का रूप ले सकता है, जहाँ वह अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है, जो कि खतरनाक है।

  2. प्रक्रिया और कानून (शंकर का तर्क): शंकर का तर्क व्यावहारिक है। वास्तविक जीवन में कोई भी बदलाव लाने के लिए कानून बनाना पड़ता है, बजट की व्यवस्था करनी होती है और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना होता है। यह सब एक दिन में संभव नहीं है।

  3. जवाबदेही: लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। फिल्मों में दिखाया गया 'त्वरित न्याय' सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इसमें गलतियाँ होने और निर्दोषों को नुकसान पहुँचने का डर रहता है।

निष्कर्ष: ऐसी फ़िल्में मनोरंजन के लिए तो अच्छी हैं, लेकिन देश को 'सुपरहीरो' की नहीं बल्कि 'मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं' और 'सजग नागरिकों' की ज़रूरत है। रिज़वान और शंकर के तर्क अधिक सही और लोकतांत्रिक हैं।

Related Questions

आरक्षण पर आदेश का उदाहरण पढ़कर तीन विद्यार्थियों की न्यायपालिका की भूमिका पर अलग-अलग प्रतिक्रिया थी। इनमें से कौन-सी प्रतिक्रिया, न्यायपालिका की भूमिका को सही तरह से समझती है?

क. श्रीनिवास का तर्क है कि चूँकि सर्वोच्च न्यायालय सरकार के साथ सहमत हो गई है लिहाजा वह स्वतंत्र नहीं है।
ख. अंजैया का कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है क्योंकि वह सरकार के आदेश के खिलाफ़ फ़ैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को उसमें संशोधन का निर्देश दिया।
ग. विजया का मानना है कि न्यायपालिका न तो स्वतंत्र है न ही किसी के अनुसार चलने वाली है बल्कि वह विरोधी समूहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। न्यायालय ने इस आदेश के समर्थकों और विरोधियों के बीच बढ़िया संतुलन बनाया।

आपकी राय में कौन-सा विचार सबसे सही है?

READ FULL ANSWER »
VIEW ALL SOLUTIONS

Chapter Info

Subject: लोकतांत्रिक राजनीति
Class: class 9
Chapter 4: संस्थाओं का कामकाज
Medium: Hindi Medium