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युद्धों से जंगल क्यों प्रभावित होते हैं? - भारत और समकालीन विश्व – I
युद्धों से जंगल क्यों प्रभावित होते हैं?
युद्धों से जंगल निम्नलिखित कारणों से प्रभावित होते हैं:
सैन्य आवश्यकताएँ: युद्ध के दौरान सेना की ज़रूरतों (जैसे—जहाज़ बनाने, रेल की पटरियाँ बिछाने, बंकर बनाने और ईंधन) के लिए लकड़ी की माँग बहुत बढ़ जाती है। इस माँग को पूरा करने के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जाती है।
'भस्म कर दो' नीति (Scorched Earth Policy): युद्ध में जब सेना को पीछे हटना पड़ता है, तो वह अपने ही जंगलों और लकड़ी के ढेरों को जला देती है ताकि दुश्मन सेना उन संसाधनों का उपयोग न कर सके। उदाहरण के लिए, द्वितीय विश्व युद्ध में जावा में डचों ने जापानियों के कब्ज़े से पहले ऐसा ही किया था।
नियंत्रण का अभाव: युद्ध के समय वन विभाग का नियंत्रण ढीला पड़ जाता है। इसका फ़ायदा उठाकर स्थानीय लोग और ठेकेदार अपनी ज़रूरतों या मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों को काट डालते हैं।
पुनर्निर्माण: युद्ध समाप्त होने के बाद, तबाह हुए शहरों, घरों और बुनियादी ढाँचे के दोबारा निर्माण के लिए भारी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है, जिससे वनों पर दबाव बढ़ता है।
जापानी औपनिवेशिक विस्तार: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों ने अपने युद्ध उद्योगों के लिए जंगलों का बेतहाशा दोहन किया, जिससे कई क्षेत्रों के जंगल पूरी तरह साफ़ हो गए।