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क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश मे... - भारत और समकालीन विश्व – I
क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में नाना अंतर्विरोध थे?
हाँ, मैं इस तर्क से सहमत हूँ कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में कई अंतर्विरोध थे। इसके मुख्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
महिलाओं की उपेक्षा: 'मानव और नागरिक अधिकारों के घोषणापत्र' में महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकार नहीं दिए गए। उन्हें 'निष्क्रिय नागरिक' माना गया और उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं मिला।
दास प्रथा: फ्रांसीसी क्रांति 'स्वतंत्रता' की बात करती थी, लेकिन फ्रांस के उपनिवेशों में दास प्रथा जारी रही। बागान मालिकों के डर से नेशनल असेंबली ने लंबे समय तक दास प्रथा पर रोक नहीं लगाई।
संपत्ति पर आधारित अधिकार: वोट देने का अधिकार केवल 'सक्रिय नागरिकों' (25 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष जो कर चुकाते थे) तक सीमित था। समाज के गरीब पुरुषों और भूमिहीन श्रमिकों को मतदान के अधिकार से वंचित रखा गया।
उपनिवेशवाद: ये अधिकार मुख्य रूप से फ्रांस के नागरिकों के लिए थे, जबकि फ्रांस के अधीन अन्य देशों (उपनिवेशों) के लोगों को ये अधिकार प्राप्त नहीं थे।
अतः, ये अधिकार वास्तव में 'सार्वभौमिक' नहीं थे क्योंकि इनमें समाज के कई बड़े वर्गों को शामिल नहीं किया गया था।