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फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई? - भारत और समकालीन विश्व – I
फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई?
फ्रांस में क्रांति की शुरुआत निम्नलिखित परिस्थितियों के कारण हुई:
आर्थिक संकट: लंबे समय तक चले युद्धों और वर्साय के महल की फिजूलखर्ची के कारण फ्रांस का राजकोष खाली हो चुका था। सरकार पर भारी कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए जनता पर कर (Tax) बढ़ाना अनिवार्य हो गया था।
सामाजिक असमानता: फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में बँटा था।प्रथम दो एस्टेट्स (पादरी और कुलीन) को विशेषाधिकार प्राप्त थे और वे टैक्स नहीं देते थे। सारा आर्थिक बोझ केवल तीसरे एस्टेट (व्यापारी, किसान, मजदूर) पर था।
जीविका संकट: जनसंख्या बढ़ने और फसल खराब होने के कारण अनाज की कमी हो गई। इससे मुख्य खाद्य 'पावरोटी' की कीमतें बहुत बढ़ गईं, जबकि मजदूरों की मजदूरी नहीं बढ़ी। लोग भूखे मरने लगे।
मध्यम वर्ग और दार्शनिकों का प्रभाव: उभरते शिक्षित मध्यम वर्ग ने जॉन लॉक और रूसो जैसे दार्शनिकों के विचारों से प्रेरित होकर जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों का विरोध किया और समानता की माँग की।
तात्कालिक कारण: 5 मई 1789 को लुई XVI ने नए करों के प्रस्ताव के लिए 'एस्टेट्स जनरल' की बैठक बुलाई।इसमें तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक वोटिंग (एक व्यक्ति-एक वोट) की माँग की। राजा द्वारा इसे ठुकराने पर उन्होंने विरोध स्वरूप खुद को 'नेशनल असेंबली' घोषित कर दिया, जिससे क्रांति की शुरुआत हुई।