
Get Updates
Subscribe to receive instant notifications for new study materials and important updates.
निर्धनता उन्मूलन की वर्तमान सरकारी रणनीति पर चर्चा करें। - अर्थशास्त्र
निर्धनता उन्मूलन की वर्तमान सरकारी रणनीति पर चर्चा करें।
निर्धनता उन्मूलन की वर्तमान सरकारी रणनीति मुख्य रूप से दो स्तंभों पर आधारित है:
1. आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन:
सरकार का मानना है कि उच्च आर्थिक विकास दर से रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और मानव विकास में निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। जब अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है, तो उसका लाभ धीरे-धीरे समाज के निचले तबकों तक पहुँचता है।
2. लक्षित निर्धनता विरोधी कार्यक्रम:
उन लोगों के लिए जो आर्थिक विकास का सीधा लाभ नहीं उठा पाते, सरकार ने कई विशिष्ट योजनाएँ शुरू की हैं:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा - MGNREGA), 2005: इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों के सुरक्षित रोज़गार की गारंटी देना है। इसमें एक-तिहाई रोज़गार महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
प्रधानमंत्री रोज़गार योजना (PMRY), 1993: इस योजना का उद्देश्य शिक्षित बेरोज़गार युवाओं के लिए छोटे व्यवसाय और उद्योग स्थापित करके स्वरोज़गार के अवसर पैदा करना है।
ग्रामीण रोज़गार सृजन कार्यक्रम (REGP), 1995: इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वरोज़गार के अवसर सृजित करना है।
स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोज़गार योजना (SGSY), 1999: इस कार्यक्रम का उद्देश्य निर्धन परिवारों को स्व-सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करके और उन्हें बैंक ऋण व सरकारी सहायता देकर निर्धनता रेखा से ऊपर लाना है।
प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY), 2000: इसके अंतर्गत राज्यों को प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आश्रय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए केंद्रीय सहायता दी जाती है।
अंत्योदय अन्न योजना (AAY): यह निर्धनों में भी 'सबसे निर्धन' लोगों को बहुत कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
निष्कर्ष: हालाँकि इन योजनाओं के परिणाम सकारात्मक रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और सही कार्यान्वयन की कमी के कारण इनके लाभ अभी भी पूरी तरह से सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुँच पाए हैं।