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भारत में 1993 से निर्धनता की प्रवृत्तियों पर चर्चा करें। - अर्थशास्त्र
भारत में 1993 से निर्धनता की प्रवृत्तियों पर चर्चा करें।
भारत में 1993 से निर्धनता की प्रवृत्तियों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
निर्धनता अनुपात में गिरावट: 1993-94 में भारत में निर्धनता अनुपात लगभग 45 प्रतिशत था, जो 2004-05 में गिरकर 37.2 प्रतिशत हो गया और 2011-12 में यह और कम होकर 21.9 प्रतिशत पर आ गया।
निर्धनों की कुल संख्या: हालाँकि निर्धनता के प्रतिशत में कमी आई, लेकिन निर्धनों की कुल संख्या काफी समय तक लगभग 32 करोड़ के आसपास बनी रही। 2004-05 में निर्धनों की संख्या लगभग 40.7 करोड़ थी, जो 2011-12 में घटकर 27 करोड़ रह गई।
ग्रामीण और शहरी गिरावट: निर्धनता में कमी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता का अनुपात शहरी क्षेत्रों की तुलना में अभी भी अधिक है।
भावी अनुमान: यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में और अधिक कमी आने की संभावना है।
निष्कर्ष: 1993 के बाद से भारत में निर्धनता में गिरावट की प्रवृत्ति सकारात्मक रही है, लेकिन अब भी एक बड़ी आबादी निर्धनता के चक्र में फँसी हुई है।