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प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं क... - क्षितिज भाग-1
प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ 'मूर्ख' का प्रयोग न कर किस नए अर्थ की ओर संकेत किया है?
प्रेमचंद ने गधे की निम्नलिखित स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसे 'मूर्ख' के रूढ़ अर्थ में प्रयोग न कर, उसे 'ऋषि-मुनियों' के समान ऊँचे अर्थ की ओर संकेत किया है:
अत्यधिक सीधापन: गधा बहुत सीधा होता है और कभी किसी से विरोध नहीं करता।
सहनशीलता: वह हर तरह के कष्ट और अपमान को चुपचाप सहन कर लेता है।
क्रोध का अभाव: उसे कभी क्रोध करते नहीं देखा जाता, चाहे उसे कितना भी मारा जाए या उसके सामने खराब खाना ही क्यों न रखा जाए।
सुख-दुख में एक समान: लाभ-हानि, सुख-दुख या कैसी भी परिस्थिति हो, उसके चेहरे पर हमेशा एक स्थायी शांति (विषाद) बनी रहती है।
इन्हीं गुणों के कारण लेखक ने कहा है कि गधा बेवकूफ नहीं, बल्कि सद्गुणों की पराकाष्ठा है।