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'लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।' – ... - क्षितिज भाग-1
'लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।' – हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचंद के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचंद के निम्नलिखित दृष्टिकोण स्पष्ट होते हैं:
नारी का सम्मान: प्रेमचंद का मानना है कि समाज में नारी का स्थान बहुत ऊँचा है और वह हमेशा सम्मान की पात्र है।
हिंसा का विरोध: वे स्त्री के प्रति किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा या प्रताड़ना के सख्त खिलाफ हैं। उनके अनुसार, नारी पर हाथ उठाना वीरता नहीं, बल्कि कायरता है।
नैतिक मर्यादा: प्रेमचंद समाज में कुछ ऐसे नैतिक नियम और मर्यादाएँ चाहते थे, जिनका पालन पशु भी करते हैं। वे पशुओं के माध्यम से मनुष्यों को यह याद दिलाना चाहते हैं कि पुरुषों को अपनी शक्ति का प्रयोग स्त्रियों को दबाने के लिए नहीं करना चाहिए।
सहिष्णुता: हीरा का यह कहना कि "स्त्री पर सींग चलाना मना है", यह दर्शाता है कि पुरुष को हर हाल में अपनी मर्यादा और संस्कारों का ध्यान रखना चाहिए।