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परियोजना कार्य (i) पता लगाएँ कि आपके क्षेत्र में एक विशेष मौस... - समकालीन भारत
परियोजना कार्य
(i) पता लगाएँ कि आपके क्षेत्र में एक विशेष मौसम से कौन से गानें, नृत्य, पर्व एवं भोजन संबंधित हैं? क्या भारत के दूसरे क्षेत्रों से इनमें कुछ समानता है ?
(ii) भारत के विभिन्न क्षेत्रों के विशेष ग्रामीण मकानों तथा लोगों की वेश-भूषा के फोटोग्राफ इकट्ठे कीजिए। देखिए कि क्या उनमें और उन क्षेत्रों की जलवायु की दशाओं तथा उच्चावच में कोई संबंध है।
(i) विशेष मौसम से संबंधित संस्कृति और समानता:
चुना गया मौसम: वर्षा ऋतु (मानसून)
गाने: कजरी और मल्हार (विशेषकर उत्तर भारत में गाए जाने वाले लोक गीत)।
नृत्य: तीज़ नृत्य और चरकुला।
पर्व: हरियाली तीज़, रक्षाबंधन और ओणम (दक्षिण भारत)।
भोजन: घेवर, पकौड़े, मालपुआ और खीर।
समानता: भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में वर्षा ऋतु का स्वागत उत्सवों के साथ किया जाता है। जैसे उत्तर भारत में 'तीज़' मनाई जाती है, वैसे ही केरल में 'ओणम' मनाया जाता है। दोनों ही पर्व अच्छी फसल और खुशहाली से जुड़े हैं। भोजन में तली-भुनी चीज़ों का प्रचलन लगभग पूरे देश में इस मौसम के दौरान रहता है।
(ii) मकान, वेश-भूषा और जलवायु का संबंध:
भारत के विभिन्न क्षेत्रों के मकान और वेश-भूषा वहाँ की जलवायु से गहरे जुड़े हैं:
असम और उत्तर-पूर्व भारत (अधिक वर्षा):
मकान: यहाँ घर 'बाँस के खंभों' (Stilts) पर बनाए जाते हैं ताकि बाढ़ के पानी से बचा जा सके। छतें बहुत 'ढलवा' (Sloping) होती हैं ताकि बारिश का पानी आसानी से गिर जाए।
वेश-भूषा: लोग हल्के सूती कपड़े पहनते हैं जो नमी वाले मौसम में आरामदायक होते हैं।
राजस्थान (अधिक गर्मी और शुष्क जलवायु):
मकान: घरों की दीवारें बहुत 'मोटी' होती हैं ताकि गर्मी अंदर न आए। छतें 'सपाट' (Flat) होती हैं और खिड़कियाँ छोटी रखी जाती हैं।
वेश-भूषा: यहाँ लोग धूप से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह ढकने वाले ढीले कपड़े और सिर पर बड़ी पगड़ी (Safa) पहनते हैं।
कश्मीर और लद्दाख (अत्यधिक ठंड):
मकान: यहाँ लकड़ी का अधिक उपयोग होता है और छतें बहुत ढलवा होती हैं ताकि बर्फ जमा न हो।
वेश-भूषा: ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़े और 'फेरन' (लंबा ऊनी कुर्ता) पहनते हैं।
तटीय क्षेत्र (केरल/तमिलनाडु - आर्द्र जलवायु):
मकान: घरों में वेंटिलेशन (हवा आने-जाने के रास्ते) अधिक होते हैं।
वेश-भूषा: यहाँ लोग मुख्य रूप से सूती मुंडू (धोती) और सूती साड़ियाँ पहनते हैं क्योंकि यहाँ साल भर गर्मी और उमस रहती है।
निष्कर्ष: मकानों की बनावट और कपड़ों का चयन पूरी तरह से उस क्षेत्र के तापमान, वर्षा की मात्रा और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों (जैसे पत्थर, लकड़ी या बाँस) पर निर्भर करता है।