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भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं... - समकालीन भारत
भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं- उदाहरण सहित कारण दीजिए।
भारत में जीव और पादप प्रजातियों के संकटग्रस्त होने के मुख्य कारण और उदाहरण निम्नलिखित हैं:
संकटग्रस्त होने के कारण:
अत्यधिक शिकार: लालची व्यापारियों द्वारा खाल, हड्डियों और सींगों के लिए अवैध शिकार करना।
प्रदूषण: औद्योगिक अपशिष्ट, रसायनों के जमाव और कीटनाशकों के प्रयोग के कारण पर्यावरण का दूषित होना।
वनों की कटाई: खेती, निवास और उद्योगों के लिए वनों को साफ करना, जिससे जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
विदेशी प्रजातियों का प्रवेश: बाहरी प्रजातियों के आने से स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र का असंतुलित होना।
जनसंख्या वृद्धि: बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
उदाहरण:
प्राणी जगत: बाघ (Tiger), एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhino), एशियाई शेर, भारतीय हाथी और गुलाबी सिर वाली बत्तख।
पादप जगत: सर्पगंधा, चंदन और कई अन्य औषधीय पौधे जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।
(भारत में लगभग 1,300 पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं और 20 प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।)