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1917 में ज़ार का शासन क्यों खत्म हो गया? - भारत और समकालीन विश्व – I
1917 में ज़ार का शासन क्यों खत्म हो गया?
1917 में ज़ार का शासन खत्म होने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: युद्ध में रूस की भारी हार हुई और 70 लाख से अधिक सैनिक मारे गए। युद्ध के कारण देश के संसाधन खत्म हो गए और पीछे हटती रूसी सेना ने फसलें व इमारतें नष्ट कर दीं, जिससे रूस में शरणार्थियों और भोजन की समस्या बढ़ गई।
आर्थिक संकट और खाद्य कमी: युद्ध के कारण उद्योग बंद हो गए और रेलवे लाइनें ठप हो गईं। शहरों में अनाज की भारी किल्लत हो गई, जिससे रोटी की दुकानों पर दंगे होने लगे और जनता का गुस्सा ज़ार के खिलाफ भड़क गया।
ज़ार की निरंकुशता और अयोग्यता: ज़ार निकोलस II जनता की समस्याओं के प्रति लापरवाह था। वह ड्यूमा (संसद) की सलाह को अनदेखा करता था। रानी अलेक्जेंड्रा और उसके सलाहकार रासपुतिन के गलत फैसलों ने राजशाही को बदनाम कर दिया।
सैनिकों का विद्रोह: फरवरी 1917 में जब पेट्रोग्राद में भूखे मजदूरों ने हड़ताल की, तो ज़ार ने उन पर गोली चलाने का आदेश दिया। लेकिन सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया और वे विद्रोहियों के साथ मिल गए।
फरवरी क्रांति: मजदूरों और सैनिकों की एकजुटता ने ज़ार को पूरी तरह अकेला कर दिया। अंततः सैन्य कमांडरों की सलाह पर 2 मार्च 1917 को ज़ार को गद्दी छोड़नी पड़ी।