
Get Updates
Subscribe to receive instant notifications for new study materials and important updates.
शिक्षित बेरोज़गारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों है? - अर्थशास्त्र
शिक्षित बेरोज़गारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों है?
शिक्षित बेरोज़गारी भारत के लिए एक विशेष समस्या होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
विरोधाभासी स्थिति: भारत में एक ओर मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री धारक युवाओं की भारी भीड़ बेरोज़गार है, तो दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में तकनीकी रूप से कुशल व्यक्तियों की कमी है।
मानव पूँजी की बर्बादी: शिक्षा और प्रशिक्षण पर भारी निवेश के बाद जब शिक्षित युवा रोज़गार नहीं पाते, तो यह देश के बहुमूल्य मानव संसाधन की बर्बादी है।
आर्थिक बोझ: बेरोज़गार युवाओं की संख्या बढ़ने से वे कार्यशील जनसंख्या पर बोझ बन जाते हैं, जिससे देश की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हताशा और निराशा: लंबे समय तक रोज़गार न मिलने के कारण युवाओं में मनोवैज्ञानिक तनाव और हताशा पैदा होती है, जो समाज में असामाजिक गतिविधियों और अस्थिरता को जन्म दे सकती है।
कौशल और बाज़ार की माँग में अंतर: भारत में डिग्रियाँ तो बहुत हैं, लेकिन उद्योगों की माँग के अनुसार व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) की कमी है, जिसके कारण शिक्षित होने के बावजूद लोग नौकरी के योग्य नहीं मिल पाते।