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प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी में क्या अंतर है? - अर्थशास्त्र
Question
प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी में क्या अंतर है?
उत्तर (Answer)
प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
| आधार | प्रच्छन्न (छिपी हुई) बेरोज़गारी | मौसमी बेरोज़गारी |
| अर्थ | इसमें लोग काम पर लगे हुए तो दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में उनकी उत्पादकता शून्य होती है। | यह तब होती है जब लोगों को वर्ष के कुछ महीनों (जैसे बुआई या कटाई के बीच का समय) में काम नहीं मिल पाता। |
| श्रमिकों की संख्या | इसमें आवश्यकता से अधिक लोग एक ही काम में लगे होते हैं। | इसमें श्रमिक केवल मौसम के अनुसार ही काम पाते हैं और बाकी समय बेकार रहते हैं। |
| उत्पादन पर प्रभाव | यदि इनमें से कुछ लोगों को काम से हटा दिया जाए, तो भी कुल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता। | इसमें काम न होने वाले महीनों में श्रमिक की आय और उत्पादन पूरी तरह रुक जाता है। |
| क्षेत्र | यह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि परिवारों में पाई जाती है। | यह कृषि आधारित उद्योगों और खेती से जुड़े क्षेत्रों में पाई जाती है। |