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जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह द... - विज्ञान
जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम को स्पष्ट कीजिए। गोलक कुछ समय पश्चात् विराम अवस्था में क्यों आ जाता है? अंततः इसकी ऊर्जा का क्या होता है? क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है?
ऊर्जा परिवर्तन और संरक्षण: जब लोलक का गोलक अपनी चरम स्थिति (किनारे) पर होता है, तो उसमें स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है। जैसे ही वह नीचे (मध्य स्थिति) की ओर आता है, यह स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।
विराम अवस्था में आने का कारण: गोलक कुछ समय बाद इसलिए रुक जाता है क्योंकि हवा का घर्षण उसकी गति का विरोध करता है।
ऊर्जा का क्या होता है: लोलक की यांत्रिक ऊर्जा घर्षण के कारण धीरे-धीरे ऊष्मीय ऊर्जा में बदलकर वातावरण में विलीन हो जाती है।
नियम का उल्लंघन: नहीं, यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन नहीं है। ऊर्जा नष्ट नहीं हुई है, बल्कि उसने केवल अपना रूप (यांत्रिक से ऊष्मीय) बदला है।
