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आशय स्पष्ट कीजिए—(क) वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक ज़िंदगी ... - क्षितिज भाग-1
आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक ज़िंदगी का प्रतिरूप बन गए थे।
(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा!
(ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।
(क) आशय: इसका आशय यह है कि सालिम अली का जीवन डी.एच. लॉरेंस की तरह ही अत्यंत सहज, सरल और प्रकृति के करीब था। वे बनावटीपन और दिखावे से दूर थे तथा प्रकृति के साथ पूरी तरह एकाकार होकर नैसर्गिक (प्राकृतिक) जीवन जीते थे।
(ख) आशय: यहाँ लेखक सालिम अली की मृत्यु के संदर्भ में कह रहे हैं कि मृत्यु एक अंतिम सत्य है। जिस प्रकार एक मृत पक्षी को कोई व्यक्ति अपने शरीर की गर्मी या दिल की धड़कन देकर भी दोबारा जीवित नहीं कर सकता, उसी प्रकार सालिम अली अब इस दुनिया से जा चुके हैं। उन्हें किसी भी प्रयास से वापस नहीं लाया जा सकता और न ही उनके सपनों को दोबारा जीवंत किया जा सकता है।
(ग) आशय: टापू एक सीमित और छोटा क्षेत्र होता है, जबकि सागर विशाल, गहरा और असीम होता है। सालिम अली का अनुभव और ज्ञान किसी विशेष सीमा या दायरे में बँधा हुआ नहीं था। उन्होंने प्रकृति और पक्षियों के बारे में जो जानकारी और प्रेम संजोया था, वह अथाह और असीमित था। वे एक विशाल व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे।