
Get Updates
Subscribe to receive instant notifications for new study materials and important updates.
भारत के लोकतंत्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे ... - लोकतांत्रिक राजनीति
भारत के लोकतंत्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे में कुछ अलग-अलग विचार इस प्रकार हैं। आप इनमें से हर कथन को भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कितना महत्त्वपूर्ण कारण मानते हैं?
क. अंग्रेज़ शासकों ने भारत को उपहार के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था दी। हमने ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी प्रांतीय असेंबलियों के ज़रिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया।
ख. हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने औपनिवेशिक शोषण और भारतीय लोगों को तरह-तरह की आज़ादी न दिए जाने का विरोध किया। ऐसे में स्वतंत्र भारत को लोकतांत्रिक होना ही था।
ग. हमारे राष्ट्रवादी नेताओं की आस्था लोकतंत्र में थी। अनेक नव स्वतंत्र राष्ट्रों में लोकतंत्र का न आना हमारे नेताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
इन कथनों का महत्त्व इस प्रकार है:
क. यह आंशिक रूप से महत्त्वपूर्ण है। इसे 'उपहार' कहना गलत होगा क्योंकि भारतीयों ने इन अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। हाँ, ब्रिटिश समय की प्रांतीय असेंबलियों में काम करने के अनुभव ने भारतीय नेताओं को संसदीय व्यवस्था का ढाँचा समझने और चलाने का 'प्रशिक्षण' ज़रूर दिया, जिससे संविधान बनाने में मदद मिली।
ख. यह अत्यधिक महत्त्वपूर्ण कारण है। हमारा स्वतंत्रता संग्राम केवल विदेशी शासन के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय और शोषण के खिलाफ भी था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय के लोकतांत्रिक मूल्यों की आदत पड़ गई थी, इसलिए स्वतंत्र भारत का लोकतंत्र होना स्वाभाविक और तय था।
ग. यह भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लोकतंत्र की सफलता केवल संस्थाओं पर नहीं, बल्कि नेताओं की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। जहाँ कई अन्य देशों में आजादी के बाद नेता तानाशाह बन गए, वहीं भारत के नेताओं (जैसे नेहरू, पटेल, आंबेडकर) ने लोकतंत्र के प्रति अपनी गहरी आस्था दिखाई, जिससे भारत में लोकतांत्रिक जड़ें मजबूत हुईं।