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आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के ... - भारत और समकालीन विश्व – I
आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गड़रियों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे।
भारतीय चरवाहों और मासाई गड़रियों के जीवन में आए परिवर्तनों की दो प्रमुख समानताएँ निम्नलिखित थीं:
चरागाहों की भारी कमी: दोनों ही क्षेत्रों में औपनिवेशिक सरकारों ने चरागाहों को खेती की ज़मीन में बदल दिया या उन्हें राष्ट्रीय उद्यानों (जैसे—भारत में आरक्षित वन और अफ्रीका में मासाई मारा/सेरेन्गेटी पार्क) के लिए आरक्षित कर दिया। इससे दोनों समुदायों के पास अपने पशुओं को चराने के लिए बहुत कम और खराब गुणवत्ता वाली ज़मीन बची।
आवाजाही पर प्रतिबंध: भारत और अफ्रीका, दोनों जगह चरवाहों की स्वतंत्र आवाजाही पर रोक लगा दी गई। भारत में 'वन अधिनियम' और 'अपराधी जनजाति अधिनियम' के तहत चरवाहों को परमिट लेने पर मजबूर किया गया, जबकि अफ्रीका में मासाई समुदाय को विशेष 'रिजर्व' क्षेत्रों में सीमित कर दिया गया और उन्हें गोरे लोगों के इलाकों में जाने से रोक दिया गया।