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इस बारे में चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून... - भारत और समकालीन विश्व – I
इस बारे में चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइए कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा :
➢ परती भूमि नियमावली
➢ वन अधिनियम
➢ अपराधी जनजाति अधिनियम
➢ चराई कर
औपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के कारण और चरवाहों पर उनके प्रभाव निम्नलिखित हैं:
1. परती भूमि नियमावली (Waste Land Rules):
क्यों बनाया: औपनिवेशिक सरकार खेती न होने वाली ज़मीन को 'बेकार' मानती थी क्योंकि इससे राजस्व (Tax) नहीं मिलता था। सरकार इस ज़मीन को खेती के लायक बनाकर भू-राजस्व बढ़ाना चाहती थी।
असर: चरवाहों के पारंपरिक चरागाह छीन लिए गए। उन्हें खेती के लिए व्यक्तियों को दे दिया गया, जिससे पशुओं के चरने के लिए जगह कम हो गई।
2. वन अधिनियम (Forest Acts):
क्यों बनाया: रेलवे और जहाज़ निर्माण के लिए कीमती लकड़ी (देवदार, साल) को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने जंगलों को 'आरक्षित' और 'सुरक्षित' घोषित कर दिया।
असर: चरवाहों के जंगलों में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। उन्हें अब परमिट लेकर ही जाना पड़ता था और उनके रुकने का समय भी तय कर दिया गया। नियमों के उल्लंघन पर उन्हें जुर्माना और प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी।
3. अपराधी जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act):
क्यों बनाया: अंग्रेज़ घुमंतू लोगों को शक की नज़र से देखते थे क्योंकि उन्हें एक जगह टिककर रहने वाले लोगों पर शासन करना और टैक्स वसूलना आसान लगता था। इसलिए उन्होंने घुमंतू समुदायों को 'जन्मजात अपराधी' घोषित कर दिया।
असर: चरवाहों को खास बस्तियों में रहने पर मजबूर किया गया। उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई और उन पर पुलिस की कड़ी निगरानी रहने लगी, जिससे उनका पारंपरिक पेशा और सम्मान नष्ट हो गया।
4. चराई कर (Grazing Tax):
क्यों बनाया: अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने हर संभावित स्रोत पर टैक्स लगाया। इसमें चरागाहों में चरने वाले जानवरों पर लगने वाला 'चराई कर' भी शामिल था।
असर: चरवाहों को हर जानवर के हिसाब से टैक्स देना पड़ता था। टैक्स वसूलने का काम ठेकेदारों को दिया गया जो चरवाहों का शोषण करते थे। इससे चरवाहों पर आर्थिक बोझ बहुत बढ़ गया।